गौरैया का जीवन चक्र |Life Cycle Of House Sparrow In Hindi |

गौरैया एक छोटा सा आकर्षक पक्षी है, जिसे अक्सर घरों के आस-पास देखा जा सकता है, गौरैया फुर्तीला पक्षी है, जिसके छोटे – छोटे पंख होते हैं, और पैरों का रंग भूरा होता है| इसका शरीर हल्का भूरा – काला होता है| उनकी गर्दन पर काले धब्बे होते हैं, यह घोंसले में निवास करता है| इस आर्टिकल में गौरैया चिड़िया के जीवन चक्र तथा उसके आवास, भोजन, व व्यवहार के बारे में वर्णन किया गया है|

Contents

Content ( सामग्री )

  • गौरैया के बारे में सामान्य जानकारी :-
  • गौरैया का आवास क्या है?
  • गौरैया का आकार
  • गौरैया क्या खाते हैं?
  • गौरैया का जीवन चक्र :-
    1. गौरैया का जीवन चक्र क्या है?
    2. गौरैया का जीवनकाल के चरण :-
      1. अण्ड ( egg )
      2. हैचलिंग ( hatchling )
      3. नीड़-शावक ( nestling )
      4. Fledglings
      5. किशोर ( juvenile )
      6. युवा गौरैया ( young sparrow )
      7. वयस्क ( Adult )
  • गौरैया का व्यवहार
  • आखरी सोच

गौरैया के बारे में सामान्य जानकारी :-

यह कॉर्डेटा संघ के एव्स ( Aves ) वर्ग के अंतर्गत आने वाला जीव है, इसका वैज्ञानिक नाम Passer domesticus है| भारत में पक्षियों की लगभग 1,200 से अधिक प्रजातियां है| गौरैया एक छोटा पक्षी है,यह दिन के समय सक्रिय होते है| जिसके अग्रपाद उड़ान भरने के लिए पंखो में रूपांतरित हो जाते है,और इसकी लम्बी पूंछ पायी जाती है, जो उड़ने में मदद करती है| इसकी आँखे व चोंच पूर्ण विकसित होते है|

नर और मादा गौरैया एक दूसरे से अलग दिखते हैं| नर का सिर भूरे रंग का होता है,उसके शरीर के निचले हिस्से सीने ( आंख से गर्दन तक ) पर काला निशान होता है जिसे बिम्ब कहा जाता है| उसके गर्दन के पास सफेद कॉलर ( गाल ) होता है| और इसके पंख चमकदार होते है,पंखो पर काले,सफेद व गहरे भूरे रंग के निशान पाये जाते हैं,व पूंछ भूरे होते हैं| मादा गौरैया का शरीर भूरे रंग की होती हैं| व पँख पर हल्के काले, सफेद व भूरे निशान होते है|

गौरैया का आवास क्या है [ habitat of house sparrow ]:-

यह विभिन्न प्रकार के जलवायु को सहन कर सकता है, लेकिन विशेष रूप से यह नम उष्णकटिबंधीय जलवायु में अधिकतर पाया जाता है| यह पक्षी भारत सहित पूरी दुनिया में पाया जाता है| प्रजातियों के आधार पर इसके निवास स्थान में भिन्नता पायी जाती है| गौरैया आमतौर पर प्राकृतिक आवासों जैसे जंगलों, घास के मैदानों, खेती वाले क्षेत्रों,पेड़ों शहरों, इसके आलावा मानव निर्मित सरंचनाओं जैसे इमारतों, कारखानों, गोदामों तथा घरों में घोंसले का निर्माण करके निवास करते हैं|

गौरैया का आकार [ size of sparrow ] :-

गौरैया कि विभिन्न प्रजातियों का आकार भिन्न होता है, यह लगभग 10 से 18 सेमी ( 4 से 7 इंच ) तक लंबा होता है, इसका पंख छोटी प्रजातियों में लगभग 6 इंच, तथा बड़ी प्रजातियों में 12 इंच तक होते है| घर में वास करने वाली गौरैया 24 से 39.5 ग्राम तक होता है| नर गौरैया का वजन और आकार मादा से भिन्न होता है| मादा आम तौर पर नर की तुलना में छोटी होती हैं। औसत नर गौरैया का वजन 28.5 ग्राम होता है| तथा मादा गौरैया का वजन 25.3 ग्राम होता है, नर सर्दियों के दौरान तथा मादा प्रजनन के मौसम में तेजी से बढ़ते हैं|

गौरैया क्या खाते हैं? [ What do sparrows eat? ]:-

गौरैया सर्वभक्षी हैं, जिसका अर्थ है, कि वे भोजन के लिए पेड़-पौधे और जीव-जन्तु पर आधारित होते हैं| पक्षी का भोजन उसके निवास स्थान के आधार पर भिन्न होता है| उसके आहार में फल ( जामुन, अंगूर, सेब, चेरी, नाशपाती, आलूबुखारा ),सब्जी ( टमाटर, मटर, सोयाबीन), नट्स,खरपतवार के बीज, अनाज, बाजरा, सूरजमुखी के बीज, फूल इसके आलावा विभिन्न मोलस्क, एनालिड्स,ऑर्थ्रोपोडा ( तिलचट्टे,तितलियाँ, मक्खियाँ, मच्छर ) शामिल है|

गौरैया का जीवन चक्र [ life cycle of house sparrow ]:-

गौरैया का जीवन चक्र क्या है? [ what is life cycle of sparrow ]

जैविक परिवर्तनों और विकास का वह क्रम जिसमे गौरैया पक्षी अपने पूरी जीवनकाल से गुजरती है,जो अण्ड प्रावस्था से शुरू होकर अंत में अपने वयस्क अवस्था तक पहुंचता है,इस प्रकार यह चक्र निरंतर चलते रहता है|

गौरैया का जीवनकाल के चरण :-

गौरैया अपने जीवनकाल में निम्न चरणों से होकर गुजरता हैं:-

1.अण्ड [ egg ] :-

नर और मादा घोंसले का निर्माण करते है,घोंसला बनाने के लगभग एक सप्ताह बाद वसंत ऋतु के शुरुआत में मादा अंडे देना शुरू करती है| भिन्न-भिन्न प्रजाति की अंडों की संख्या, आकार व रंग में भिन्नता पायी जाती है| आमतौर पर 4 अंडे दिए जाते हैं,लेकिन कभी-कभी 7 अंडे भी दिए जा सकते हैं| अंडे सफेद, क्रीम या भूरे रंग के होते हैं,तथा इसके कवच हल्के चमक के साथ चिकना होता है|

अंडे कि लंबाई 20 से 22 मिमी और चौड़ाई 14 से 16 मिमी होते है,अंडों का ऊष्मायन ( अंडे सेना ) मादा द्वारा 10-14 दिन तक किया जाता है,ताकि भ्रूण चूजे के रूप में विकसित हो सके, जबकि नर घोंसले के आस -पास घूमता रहता है| अंडे के अंदर विकसित हो रहे चूजे के चोंच के ऊपरी भाग पर एक विशेष कठोर संरचना का विकास होता है, जिसे दाँत कहा जाता हैं, जो अंडे के खोल को तोड़ने में मदद करता है|

2.हैचलिंग [ hatchling ]:-

अंडे के कवच से बाहर आने के बाद इसे हैचलिंग ( hatchling ) कहा जाता है,इसके कुछ दिनों बाद दाँत गिर जाता है, इस अवस्था में चूजे बेहद नाजुक होते हैं,इसकी त्वचा चमकदार गुलाबी होती है, इसकी आँखें बंद होती है,वह अपनी आँखें नहीं खोल सकता, वह केवल भोजन के लिए अपना सिर उठा सकता है| तथा इसकी चोंच पीली व कोमल होती है,इसके पंख नहीं होते हैं, इस चरण में यह उड़ान भरने में असमर्थ होता है|

अपने असहाय स्वभाव के कारण यह कभी-कभी शिकारियों का शिकार हो जाता है| इस चरण में विकसित होने के लिए उन्हें माता-पिता की अत्यधिक निगरानी की आवश्यकता होती है| और उन्हें केवल नरम और बहुत आसानी से पचने वाले खाद्य पदार्थों को खिलाया जाता है,पहले सप्ताह में विशेष रूप से अंडे की जर्दी व पका हुआ अनाज खिलाया जाता है|

3.नीड़-शावक ( nestling ) :-

जैसे-जैसे पक्षी का बच्चा बढ़ते जाता है, वैसे-वैसे उसका माता-पिता द्वारा विशेष ध्यान रखा जाता है, इस स्तर पर उन्हें नीड़-शावक ( nestling ) कहा जाता है| यह पांचवें दिन तक लंबाई में बढ़ता है,और अपने पैरों पर खड़े होने में सक्षम होता है,पांच दिन के बाद इसकी आँखें पूरी तरह से खुल जाती है, व पंख निकलना शुरू हो जाता है| यह अपने पंख फैला सकता है, लेकिन घोंसले को छोड़ने में असमर्थ होता है,तथा भोजन और गर्मी ( ऊष्मा ) के लिए अपने माता-पिता पर निर्भर रहता है,इस अवस्था की अवधि लगभग 10-14 दिन की होती है|

4.फ्लेगलिंग्स [ Fledglings ]:-

इस चरण में गौरैया का बच्चा उड़ान भरने की कोशिश करता है, लेकिन वह अभी उड़ नहीं सकता, यह आमतौर पर कूदते हैं, या घोंसले से बाहर आ पाते हैं, क्योंकि वे अभी केवल उड़ना सीख रहे हैं, इस अवस्था में इसे Fledglings कहा जाता है| यह अपनी उड़ान क्षमताओं को विकसित करता है, इसके पंखों की मांसपेशियां ( श्वेत पेशी ) मजबूत व विकसित होती जाती हैं, इस प्रावस्था में यह काफी सक्रिय और मजबूत होते हैं, तथा जल्दी विकसित होते हैं| गौरैया लगभग 11 से 23 दिनों तक घोंसले में रहती हैं| इसमें 7 से 10 दिनों में कुछ उड़ान विशेषताए दिखने लगते है| और यह अपनी पहली उड़ान लेने के लिए तैयार हो जाता है| यह केवल कम दूरी के लिए उड़ान भरने में सक्षम होते हैं|

वह अभी भी अपने माता-पिता की देखरेख में रहते है|

5.किशोर [ juvenile ] :-

इस अवस्था में पक्षी घोंसले को छोड़ने के लिए तैयार होता है,अब उसे किशोर ( Juvenile ) कहा जाता है| उनकी लंबाई बहुत कम होती है| इस अवस्था में किशोर पक्षी अपनी पहली परत ( बाह्यकंकाल को पंखों की पहली परत से कवर करता है| ) से गुजरता है, और एक वयस्क पक्षी के सामान दिखने लगता है|

प्रजातियों के आधार पर लगभग 10 से 17 वें दिन में शिशु पक्षी अपना घोंसला छोड़ना शुरू कर देता है|

यह चरण गौरैयों के लिए उड़ान में कौशल हासिल करने के लिए महत्वपूर्ण है, वे सीखने के दौरान अक्सर गिर जाते हैं, जिससे दुर्घटना से वह अक्सर मर जाते है|

6.युवा गौरैया [young sparrow ]:-

इस अवस्था में पक्षी का पंख पूरी तरह से विकसित होते हैं, अपरिपक्व पक्षी वयस्क मादा के समान दिखाई देता है| नर पक्षी अब सफ़ेद गाल (कॉलर) व धूसर शीर्ष तथा उसके सीने में बिब ( एक बड़ा काला निशान ) विकसित होने लगते हैं| इसके चोंच के आधार तक पीलापन पूरी तरह से फीका पड़ने लगता है| और गौरैया आमतौर पर जीवन के तीसरे सप्ताह तक ऊँची उड़ान भरने में सक्षम हो जाते है,तथा वह उड़ने के लिए स्वतंत्र हो जाते हैं|

जब तक वह लगभग छह सप्ताह के नहीं हो जाते तब तक उसे माता-पिता द्वारा बच्चों को खिलाया जाता है| इस अवस्था में युवा को वयस्क के सामान कीट, आनाज खिलाया जाता है| युवा अक्सर बड़े झुंड में इकट्ठा होते हैं, और शरद ऋतु में इसका समूह अपने घोंसले पर लौट आते हैं|

कुछ प्रजातियाँ युवा अवस्था तक परिपक्व हो जाती हैं, उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पक्षी केवल कुछ ही महीने में परिपक्व हो जाते है, लेकिन आमतौर पर प्रजनन परिपक्वता पक्षियों की प्रजातियों पर निर्भर करता है|

7.वयस्क [ Adult ]:–

यह पूर्ण विकसित होते है,यह 5 से 6 इंच लंबाई के होते हैं| नर का सिर गहरे भूरे रंग व गर्दन पर काला धब्बा होता है| यह पूरी तरह से परिपक्व होता है| इस चरण में पक्षी प्रजनन करने में सक्षम होता है|

प्रजनन और अंडे देने का समय भौगोलिक रूप से भिन्न होता है, क्योंकि अंडे के गठन और भरण पोषण के लिए पर्याप्त कीड़ों की आवश्यकता होती है| नर प्रजननकाल में मादा साथी को ढूंढने व आकर्षित करने के लिए विशिष्ट प्रकार के आवाज निकालते है,तथा प्रजनन क्रिया पूर्ण कर लेते है, उसके बाद और घोंसला बनाकर उसमे अंडे देते है,इस प्रकार पक्षी का जीवन चक्र फिर से शुरू होता है|

गौरैया 46 कि मी प्रति घंटे कि दर से उड़ान भरने में सक्षम होते है| यह लगभग 3 साल तक जीवित रह सकती है|

व्यवहार

गौरैया अपने जीवन में कई व्यवहार प्रदर्शित करते है:-

  • यह घोंसले का निर्माण करते हैं, जिसमें अंडे रखे जाते हैं,घोंसले का निर्माण लगभग वर्ष भर किया जाता है| फरवरी से मई के बीच में सबसे अधिक घोंसले के निर्माण किया जाता है| घोंसले का आकार व्यापक रूप से भिन्न होते हैं, और जिन सामग्रियों से घोंसले बनाए जाते हैं वे भी भिन्न होते हैं| आमतौर पर एक कप के समान गोलाकार, अवतल और अपेक्षाकृत छोटा होता है| जिसमें लगभग 6 इंच चौड़ा, 12 ½ इंच लंबा और 8 ½ इंच गहरा आयाम होता है, जिसे प्राकृतिक वनस्पतियों ( जैसे पौधों के तंतुओं, टहनियों, पत्तियों, घास,पुआल, तथा शैवाल,मूल, पंक्षियो के पँख और कभी-कभी कूड़े, प्लास्टिक जैसे पदार्थों का उपयोग करके घोंसला बनाया जाता है| जिसे ऊँची सुरक्षित स्थान पर बनाते है|
  • गौरैया की अपनी एक विशिष्ट ध्वनि होती है,जिसका उपयोग यह विशेष रूप से प्रजननकाल में एक साथी अपने दूसरे साथी को आकर्षित करने के लिए करते है| इसके आलावा एक ही लिंग ( नर या मादा ) की चिड़िया दूसरे चिड़िया को चेतावनी देने के लिए भी ध्वनि करते है|
  • पक्षियो में पर्चिंग ( perching ) दक्षता पायी जाती है, जिससे यह बिना गिरे पेड़ की शाखा पर आसानी से बैठने के लिए अनुकूलित होती है| पक्षी के पैर की तीन अंगुली आगे की ओर तथा एक अंगूठा पीछे की ओर व्यवस्थित होता है, उंगलियों की इस प्रकार की व्यवस्था से पंजे की पकड़ मजबूत होती है| जिससे यह पक्षियों को पर्चिंग ( पेड़ की शाखाओं पर बैठने में ) के लिए सक्षम बनाती है|
  • पक्षी बिना झटका दिए तार पर बैठ सकते हैं, क्योंकि एक एकल तार की विद्युत क्षमता ( voltage capacity ) में अंतर नहीं होता है, और इलेक्ट्रॉनों को स्थानांतरित करने के लिए विद्युत क्षमता में अंतर होना आवश्यक है| अगर विद्युत ऊर्जा उच्च वोल्टेज के क्षेत्रों से कम वोल्टेज के क्षेत्रों में बहती है,यदि यह 35,000 वोल्ट पर एक एकल बिजली तार के माध्यम से बहती है, तो यह कम से कम प्रतिरोध के मार्ग के साथ जारी रहेगा और संवाहक ( conductor ) के माध्यम से सबसे अच्छा प्रवाह करेगा| तांबा बिजली के तारों में एक अच्छा संवाहक है| लेकिन पक्षी अच्छे संवाहक नहीं हैं| यही कारण है, कि जब चिड़िया बिजली के तारों पर बैठते हैं, तो उन्हें झटका नहीं लगता है, विद्युत धारा पक्षियों को दरकिनार कर देती है, और विद्युत धारा तार के साथ बहती रहती है|
  • इसे इस तरह भी समझा जा सकता है:- पक्षी केवल एक तार पर ही बैठते है, जिससे विद्युत का परिपथ पूरा नहीं हो पाता है, और पक्षियों को करंट नहीं लगता है| लेकिन अगर पक्षी दो तारों से टकराते हैं, तो उन्हें भी करंट लग सकता है| जैसे चमगादड़ पक्षी तार पर उल्टा लटका हुआ होता है, और जैसे ही वह दो तारों के संपर्क में आता है, तो उसके शरीर के माध्यम से करंट प्रवाहित होना शुरू हो जाता है, जिससे उसकी मृत्यु हो जाती है|
  • एक कारण यह भी है, कि पक्षी एक ही समय में जमीन और तार के संपर्क में नहीं आता है| पृथ्वी सबसे बड़ा विद्युत सुचालक होती हैं| लेकिन जब भी मनुष्य किसी तार को छूता है, और उसका पैर जमीन पर होता है, तो जमीन के संपर्क में आने पर अर्थिंग के कारण परिपथ पूरा हो जाता है,और बिजली उनके शरीर से गुजरने लगती है, और उसको करंट लगता है|

इस प्रकार इस आर्टिकल में गौरैया के जीवन चक्र को विस्तार से समझाया गया है,साथ ही उनके व्यवहार व गतिविधियो के बारे मे जानकारी दिया गया है|

आशा है कि आर्टिकल पसंद आया होगा,और गौरैया के बारे में उचित जानकारी प्राप्त हुआ होगा, तथा आपके लिये उपयोगी साबित हुआ होगा,

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